कुरान - 38:62 सूरह साद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

62
وَقَالُواْ مَا لَنَا لَا نَرَىٰ رِجَالٗا كُنَّا نَعُدُّهُم مِّنَ ٱلۡأَشۡرَارِ

Transliteration: (Wa qaaloo maa lanaa laa naraa rijaalan kunnaa na'udduhum minal ashraar)

और वे कहेंगे: हमें क्या हुआ है कि हम उन लोगों को नहीं देखते जिन्हें हम बुरे लोगों में गिनते थे [113]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह साद आयत 62 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह साद तफ़सीर - आयत 62

"और वे कहेंगे: हमें क्या हुआ है कि हम उन लोगों को नहीं देखते जिन्हें हम बुरे लोगों में गिनते थे [113]?"

[62] मोमिनीन की तलाश और हैरत

काफ़िर सरदार जहन्नम में हैरान होकर एक दूसरे से पूछेंगे कि दुनिया में जिन ग़रीब और सच्चे मुसलमानों (जैसे हज़रत बिलाल, हज़रत सुहैब और हज़रत अम्मार रदियल्लाहु अन्हुम) को हम ज़लील व हक़ीर समझते थे और जिनका मज़ाक़ उड़ाते थे, वे आज इस आग में क्यों नज़र नहीं आ रहे?

इससे मालूम हुआ कि जहन्नम में वे एक दूसरे को पहचानेंगे और दुनिया की बातों को याद करेंगे।

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