कुरान - 12:15 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

15
فَلَمَّا ذَهَبُواْ بِهِۦ وَأَجۡمَعُوٓاْ أَن يَجۡعَلُوهُ فِي غَيَٰبَتِ ٱلۡجُبِّۚ وَأَوۡحَيۡنَآ إِلَيۡهِ لَتُنَبِّئَنَّهُم بِأَمۡرِهِمۡ هَٰذَا وَهُمۡ لَا يَشۡعُرُونَ

Transliteration: (Falammaa zahaboo bihee wa ajma'ooo anyyaj'aloohu fee ghayaabatil jubb; wa awhainaaa ilaihi latunabbi 'annahum bi amrihim haaza wa hum laa yash'uroon)

फिर जब वे उसे ले गए और सबने मिलकर यह तय कर लिया कि उसे गहरे अंधे कुएँ में डाल दें; और हमने यूसुफ़ की ओर वह्य भेजी कि "(धैर्य रखो!) एक दिन तुम उन्हें उनके इस करतूत की ख़बर अवश्य दोगे, उस समय जब वे (तुम्हारे मर्तबे से) बिल्कुल बेख़बर होंगे।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 15 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 15 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] कुएँ की गहराई में ईश्वरीय सांत्वना और बशारत

जंगल में ले जाकर भाइयों ने मासूम यूसुफ़ का कुर्ता उतार लिया और उन्हें गहरे पानी के अंधेरे कुएं में गिरा दिया। उस एकांत और भयानक संकट में अल्लाह तआला ने मासूम यूसुफ़ के दिल में वह्य के ज़रिए सुकून डाला कि घबराओ नहीं, तुम सुरक्षित रहोगे और एक दिन तुम मिस्र के तख़्त पर बैठकर इन भाइयों को इनके इस ज़ुल्म की याद दिलाओगे जबकि ये तुम्हें पहचान भी नहीं सकेंगे।

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