Transliteration: (Wa jaaa'oo 'alaa qameesi hee bidamin kazib qaala bal sawwalat lakum anfusukum amraa; fasabrun jameel; wallaahul musta'aanu 'alaa maatasifoon)
भाइयों ने एक बकरी के बच्चे को ज़िब्ह करके उसका ख़ून यूसुफ़ के कुर्ते पर लगा दिया था, लेकिन हड़बड़ी में वे कुर्ते को फाड़ना भूल गए। हज़रत याक़ूब ने कुर्ते को देखा जो साबुत था और ख़ून से लथपथ था। उन्होंने फ़रमाया: 'सुब्हानअल्लाह! यह कैसा दयालु भेड़िया था जिसने यूसुफ़ को तो खा लिया लेकिन उसके कुर्ते पर एक खरोंच भी नहीं लगाई!'
'सब्र-ए-जमील' वह सब्र है जिसमें इंसान अल्लाह के फ़ैसले पर राज़ी रहे, लोगों के सामने गिले-शिकवे या रोना-धोना न करे और अपना सारा मामला केवल अल्लाह के हवाले कर दे।
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