कुरान - 12:18 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

18
وَجَآءُو عَلَىٰ قَمِيصِهِۦ بِدَمٖ كَذِبٖۚ قَالَ بَلۡ سَوَّلَتۡ لَكُمۡ أَنفُسُكُمۡ أَمۡرٗاۖ فَصَبۡرٞ جَمِيلٞۖ وَٱللَّهُ ٱلۡمُسۡتَعَانُ عَلَىٰ مَا تَصِفُونَ

Transliteration: (Wa jaaa'oo 'alaa qameesi hee bidamin kazib qaala bal sawwalat lakum anfusukum amraa; fasabrun jameel; wallaahul musta'aanu 'alaa maatasifoon)

और वे उसके कुर्ते पर झूठा ख़ून लगाकर ले आए; याक़ूब ने कहा, "बल्कि तुम्हारे मनों ने तुम्हारे लिए एक बात गढ़ ली है; अतः (मेरे लिए) सुंदर सब्र (सब्र-ए-जमील) ही उत्तम है, और जो बात तुम बयान कर रहे हो उस पर केवल अल्लाह ही से मदद मांगी जा सकती है।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 18 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 18 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] कुर्ते का सुबूत और झूठ का पर्दाफ़ाश

भाइयों ने एक बकरी के बच्चे को ज़िब्ह करके उसका ख़ून यूसुफ़ के कुर्ते पर लगा दिया था, लेकिन हड़बड़ी में वे कुर्ते को फाड़ना भूल गए। हज़रत याक़ूब ने कुर्ते को देखा जो साबुत था और ख़ून से लथपथ था। उन्होंने फ़रमाया: 'सुब्हानअल्लाह! यह कैसा दयालु भेड़िया था जिसने यूसुफ़ को तो खा लिया लेकिन उसके कुर्ते पर एक खरोंच भी नहीं लगाई!'

✅ [2] "فَصَبْرٌ جَمِيلٌ" – सब्र-ए-जमील की परिभाषा

'सब्र-ए-जमील' वह सब्र है जिसमें इंसान अल्लाह के फ़ैसले पर राज़ी रहे, लोगों के सामने गिले-शिकवे या रोना-धोना न करे और अपना सारा मामला केवल अल्लाह के हवाले कर दे।

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