Transliteration: (Wa sharawhu bisamanim bakhsin daraahima ma'doo datinw wa kaanoo feehi minaz zaahideen)
क़ाफ़िले वालों (या भाइयों) को डर था कि कहीं भेद न खुल जाए, इसलिए उन्होंने हज़रत यूसुफ़ को मिस्र के बाज़ार में केवल बीस या बाईस दिरहमों की मामूली रक़म पर ग़ुलाम बनाकर बेच दिया। संसार की दृष्टि में जो कौड़ियों के भाव बिका, वह अल्लाह की नज़रों में अनमोल और पूरी दुनिया का मार्गदर्शक बनने वाला था।
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