कुरान - 12:20 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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وَشَرَوۡهُ بِثَمَنِۭ بَخۡسٖ دَرَٰهِمَ مَعۡدُودَةٖ وَكَانُواْ فِيهِ مِنَ ٱلزَّـٰهِدِينَ

Transliteration: (Wa sharawhu bisamanim bakhsin daraahima ma'doo datinw wa kaanoo feehi minaz zaahideen)

और उन्होंने उसे बहुत कम मूल्य (तुच्छ क़ीमत) पर चंद गिने-चुने दिरहमों में बेच दिया, और वे उसके विषय में बिल्कुल बेपरवाह (अल्प-इच्छुक) थे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 20 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 20 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] अल्लाह के नबी की कौड़ियों के भाव बिक्री

क़ाफ़िले वालों (या भाइयों) को डर था कि कहीं भेद न खुल जाए, इसलिए उन्होंने हज़रत यूसुफ़ को मिस्र के बाज़ार में केवल बीस या बाईस दिरहमों की मामूली रक़म पर ग़ुलाम बनाकर बेच दिया। संसार की दृष्टि में जो कौड़ियों के भाव बिका, वह अल्लाह की नज़रों में अनमोल और पूरी दुनिया का मार्गदर्शक बनने वाला था।

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