कुरान - 12:21 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

21
وَقَالَ ٱلَّذِي ٱشۡتَرَىٰهُ مِن مِّصۡرَ لِٱمۡرَأَتِهِۦٓ أَكۡرِمِي مَثۡوَىٰهُ عَسَىٰٓ أَن يَنفَعَنَآ أَوۡ نَتَّخِذَهُۥ وَلَدٗاۚ وَكَذَٰلِكَ مَكَّنَّا لِيُوسُفَ فِي ٱلۡأَرۡضِ وَلِنُعَلِّمَهُۥ مِن تَأۡوِيلِ ٱلۡأَحَادِيثِۚ وَٱللَّهُ غَالِبٌ عَلَىٰٓ أَمۡرِهِۦ وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَ ٱلنَّاسِ لَا يَعۡلَمُونَ

Transliteration: (Wa qaalal lazish taraahu mim Misra limra atiheee akrimee maswaahu 'asaaa any-yanfa'anaaa aw nattakhizahoo waladaa; wa kazaalika mak-kannaa li-Yoosufa fil ardi wa linu'allimahoo min ta'weelil ahaadees; wallaahu ghaalibun 'alaaa amrihee wa laakinna aksaran naasi laa ya'lamoon)

और मिस्र के जिस व्यक्ति (अज़ीज़-ए-मिस्र) ने उसे खरीदा, उसने अपनी पत्नी से कहा, "इसके रहने का सम्मानजनक प्रबंध करो, शायद यह हमारे काम आए या हम इसे अपना बेटा ही बना लें;" और इसी प्रकार हमने यूसुफ़ को उस ज़मीन (मिस्र) में प्रतिष्ठित किया ताकि हम उन्हें बातों की तह (सपनों की ताबीर) का ज्ञान सिखाएं; और अल्लाह अपने कार्य पर पूर्ण प्रभुत्व (ग़लबा) रखता है, लेकिन अधिकांश लोग नहीं जानते। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 21 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 21 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] अज़ीज़-ए-मिस्र के महल में आगमन

मिस्र के वित्त मंत्री (अज़ीज़) ने यूसुफ़ के चेहरे पर राजसी गरिमा और पवित्रता देखकर अपनी पत्नी (ज़ुलैख़ा) से कहा कि इसे साधारण ग़ुलाम न समझो बल्कि औलाद की तरह इज़्ज़त से रखो।

✅ [2] "وَاللَّهُ غَالِبٌ عَلَىٰ أَمْرِهِ" – ईश्वरीय योजना की सर्वोच्चता

भाइयों ने यूसुफ़ को मिटाने के लिए कुएं में फेंका था, लेकिन अल्लाह की योजना ने उसी कुएं को मिस्र के शाही महल का रास्ता बना दिया। इंसान साज़िशें रचता है, लेकिन अंतिम विजय केवल अल्लाह की तदबीर की होती है।

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