कुरान - 12:23 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

23
وَرَٰوَدَتۡهُ ٱلَّتِي هُوَ فِي بَيۡتِهَا عَن نَّفۡسِهِۦ وَغَلَّقَتِ ٱلۡأَبۡوَٰبَ وَقَالَتۡ هَيۡتَ لَكَۚ قَالَ مَعَاذَ ٱللَّهِۖ إِنَّهُۥ رَبِّيٓ أَحۡسَنَ مَثۡوَايَۖ إِنَّهُۥ لَا يُفۡلِحُ ٱلظَّـٰلِمُونَ

Transliteration: (Wa raawadat hul latee huwa fee baitihaa 'an nafsihee wa ghallaqatil abwaaba wa qaalat haita lak; qaala ma'aazal laahi innahoo rabbeee ahsana maswaay; innahoo laa yuflihuz-zaalimoon)

और जिस स्त्री के घर में वे रहते थे, उसने उन्हें अपने वश में करने (फुसलाने) का प्रयास किया और दरवाज़े बंद कर लिए और कहने लगी, "जल्दी आओ (मेरे पास)!" यूसुफ़ ने कहा, "अल्लाह की पनाह! निस्संदेह, वह (अज़ीज़) मेरा स्वामी है, उसने मुझे अच्छी तरह रखा है; बेशक ज़ालिम कभी सफल नहीं होते!" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 23 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 23 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] "مَعَاذَ اللَّهِ" – पवित्रता और चरित्र की सर्वोच्च मिसाल

ज़ुलैख़ा ने महल के सात दरवाज़े बंद करके हज़रत यूसुफ़ को पाप की दावत दी। हज़रत यूसुफ़ युवा थे, परदेस में थे और कोई देखने वाला न था, लेकिन उनके दिल में अल्लाह का डर और अहसान-शनासी थी। उन्होंने तुरंत 'मआज़ल्लाह' (अल्लाह की शरण) पुकारा और कहा कि जिसने मुझ पर उपकार किया मैं उसके घर में विश्वासघात नहीं कर सकता, और ज़ालिम कभी कामयाब नहीं होते।

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