कुरान - 12:24 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

24
وَلَقَدۡ هَمَّتۡ بِهِۦۖ وَهَمَّ بِهَا لَوۡلَآ أَن رَّءَا بُرۡهَٰنَ رَبِّهِۦۚ كَذَٰلِكَ لِنَصۡرِفَ عَنۡهُ ٱلسُّوٓءَ وَٱلۡفَحۡشَآءَۚ إِنَّهُۥ مِنۡ عِبَادِنَا ٱلۡمُخۡلَصِينَ

Transliteration: (Wa laqad hammat bihee wa hamma bihaa law laaa ar ra-aa burhaana rabbih; kazaalika linasrifa 'anhu sooo'a walfahshaaa'; innahoo min 'ibaadi nal mukhlaseen)

और निस्संदेह, उस स्त्री ने उनका इरादा कर लिया था, और वे भी उसका इरादा कर लेते यदि वे अपने रब के प्रत्यक्ष प्रमाण (बुर्हान) को न देख लेते; इसी प्रकार हुआ ताकि हम उनसे बुराई और निर्लज्जता (बदकारी) को दूर रखें; निस्संदेह, वे हमारे चुने हुए (विशुद्ध) बंदों में से थे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 24 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 24 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] 'बुर्हान-ए-रब' और नबियों की इस्मत (मासूमियत)

इंसानी फितरत के तहत स्वाभाविक आकर्षण एक बात है, लेकिन इरादा और अमल बिल्कुल दूसरी बात है। हज़रत यूसुफ़ ने अल्लाह की निशानी (अल्लाह का ख़ौफ़ और हराम से दूरी का ईश्वरीय मार्गदर्शन) देखा और तुरंत पाप से दूर हट गए। अल्लाह ने अपने मुख़लिस (विशुद्ध) बंदे को हर बुराई से पूरी तरह पाक और सुरक्षित रखा।

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