कुरान - 12:25 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

25
وَٱسۡتَبَقَا ٱلۡبَابَ وَقَدَّتۡ قَمِيصَهُۥ مِن دُبُرٖ وَأَلۡفَيَا سَيِّدَهَا لَدَا ٱلۡبَابِۚ قَالَتۡ مَا جَزَآءُ مَنۡ أَرَادَ بِأَهۡلِكَ سُوٓءًا إِلَّآ أَن يُسۡجَنَ أَوۡ عَذَابٌ أَلِيمٞ

Transliteration: (Wastabaqal baaba wa qaddat qameesahoo min duburinw wa alfayaa saiyidahaa ladal baab; qaalat maa jazaaa'u man araada bi ahlika sooo'an illaaa any-yusjana aw azaabun 'aleem)

और दोनों दरवाज़े की ओर दौड़े, और उस स्त्री ने उनका कुर्ता पीछे से फाड़ दिया, और दोनों ने दरवाज़े के पास उसके पति को मौजूद पाया; स्त्री ने तुरंत कहा, "उस व्यक्ति का क्या बदला हो सकता है जिसने तुम्हारी पत्नी के साथ बुराई का इरादा किया हो, सिवाय इसके कि उसे क़ैद कर दिया जाए या कोई दर्दनाक सज़ा दी जाए?" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 25 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 25 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] दरवाज़े की ओर दौड़ और झूठा आरोप

हज़रत यूसुफ़ बचने के लिए दरवाज़े की ओर भागे और ज़ुलैख़ा ने उन्हें रोकने के लिए पीछे से कुर्ता पकड़ा जिससे वह फट गया। दरवाज़ा खुलते ही सामने अज़ीज़-ए-मिस्र खड़ा था। स्त्री ने अपनी चोरी पकड़े जाने से पहले ही उल्टा हज़रत यूसुफ़ पर बदकारी का आरोप लगा दिया और जेल या सज़ा की मांग कर दी।

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