कुरान - 12:76 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

76
فَبَدَأَ بِأَوۡعِيَتِهِمۡ قَبۡلَ وِعَآءِ أَخِيهِ ثُمَّ ٱسۡتَخۡرَجَهَا مِن وِعَآءِ أَخِيهِۚ كَذَٰلِكَ كِدۡنَا لِيُوسُفَۖ مَا كَانَ لِيَأۡخُذَ أَخَاهُ فِي دِينِ ٱلۡمَلِكِ إِلَّآ أَن يَشَآءَ ٱللَّهُۚ نَرۡفَعُ دَرَجَٰتٖ مَّن نَّشَآءُۗ وَفَوۡقَ كُلِّ ذِي عِلۡمٍ عَلِيمٞ

Transliteration: (Fabada-a bi-aw'iyatihim qabla wi'aaa'i akheehi summas takhrajahaa minw wi 'aaa'i akheeh; kazaalika kidnaa li Yoosuf; maa kaana liyaakhuza akhaahu fee deenil maliki illaaa any yashaaa'al laah; narfa'u darajaatim man nashaaa'; wa fawqa kulli zee 'ilmin 'Aleem)

फिर यूसुफ़ ने अपने (सगे) भाई के सामान से पहले उनके सामान की तलाशी लेना शुरू किया, फिर उस प्याले को अपने भाई के सामान से निकाल लिया; इसी प्रकार हमने यूसुफ़ के लिए युक्ति (तदबीर) की; वे राजा के क़ानून के अनुसार अपने भाई को नहीं रोक सकते थे सिवाय इसके कि अल्लाह ही चाहता; हम जिसके चाहते हैं दर्जे बुलंद कर देते हैं, और हर ज्ञान वाले के ऊपर एक और बड़ा ज्ञान वाला (अल्लाह) मौजूद है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 76 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 76 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] "كَذَٰلِكَ كِدْنَا لِيُوسُفَ" – ईश्वरीय हिकमत और योजना

हज़रत यूसुफ़ ने किसी भी शक से बचने के लिए पहले सौतेले भाइयों की बोरियों की तलाशी ली और सबसे आख़िर में बिन्यामीन की बोरी से प्याला निकाला। इस प्रकार बिन्यामीन को भाइयों के अपने ही बयान के अनुसार कानूनी तौर पर अपने पास रोक लिया।

✅ [2] "وَفَوْقَ كُلِّ ذِي عِلْمٍ عَلِيمٌ" – ज्ञान की पराकाष्ठा

इंसान चाहे कितना भी बड़ा विद्वान या ज्ञानी हो, उसके ऊपर उससे बड़ा ज्ञानी मौजूद होता है, और सबसे ऊपर सर्वज्ञानी केवल अल्लाह तआला है।

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