कुरान - 12:77 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

77
۞قَالُوٓاْ إِن يَسۡرِقۡ فَقَدۡ سَرَقَ أَخٞ لَّهُۥ مِن قَبۡلُۚ فَأَسَرَّهَا يُوسُفُ فِي نَفۡسِهِۦ وَلَمۡ يُبۡدِهَا لَهُمۡۚ قَالَ أَنتُمۡ شَرّٞ مَّكَانٗاۖ وَٱللَّهُ أَعۡلَمُ بِمَا تَصِفُونَ

Transliteration: (Qaaloo iny yasriq faqad saraqa akhul lahoo min qabl; fa asarrahaa Yoosufu fee nafsihee wa lam yubdihaa lahum; qaala antum sharrum makaananw wallaahu a'lamu bimaa tasifoon)

उन (भाइयों) ने कहा, "यदि इसने चोरी की है, तो इससे पहले इसका एक (सगा) भाई भी चोरी कर चुका है!" तो यूसुफ़ ने इस बात को अपने दिल में छुपा लिया और उन पर ज़ाहिर न किया; उन्होंने (मन ही मन) कहा, "तुम बड़े ही बुरे मर्तबे वाले हो, और अल्लाह भली-भाँति जानता है जो कुछ तुम बयान कर रहे हो।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 77 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 77 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] भाइयों का पुराना द्वेष और हज़रत यूसुफ़ का बेमिसाल सब्र

भाइयों ने शर्मिंदगी से बचने के लिए तुरंत बिन्यामीन और हज़रत यूसुफ़ पर लांछन लगा दिया कि इसके सगे भाई यूसुफ़ ने भी बचपन में चोरी की थी (बचपन में ननिहाल का कोई बुत तोड़ना या दादा की कोई चीज़ हिफ़ाज़त से रखना)। हज़रत यूसुफ़ ने अपने सामने यह झूठा आरोप सुनकर भी कोई ग़ुस्सा नहीं दिखाया, बल्कि सब्र से काम लिया।

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