कुरान - 12:75 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

75
قَالُواْ جَزَـٰٓؤُهُۥ مَن وُجِدَ فِي رَحۡلِهِۦ فَهُوَ جَزَـٰٓؤُهُۥۚ كَذَٰلِكَ نَجۡزِي ٱلظَّـٰلِمِينَ

Transliteration: (Qaaloo jazaaa'uhoo manw wujida fee rahlihee fahuwa jazaaa'uh; kazaalika najziz zaalimeen)

उन्होंने कहा, "उसका बदला यह है कि जिसके सामान में वह मिले, वही स्वयं उसका बदला होगा (अर्थात उसी को ग़ुलाम बनाकर रख लिया जाए); हम ज़ालिमों (चोरों) को ऐसी ही सज़ा देते हैं!" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 75 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 75 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] इबराहीमी शरीअत में चोर की सज़ा

हज़रत याक़ूब की शरीअत में चोर की सज़ा यह थी कि जिस व्यक्ति का माल चुराया गया है, चोर एक साल तक उसका ग़ुलाम बनकर उसकी सेवा करेगा। मिस्र के क़ानून में केवल मार-पीट या जुर्माना था। भाइयों ने स्वयं अपने ही मुँह से वह सज़ा तय कर दी जो हज़रत यूसुफ़ चाहते थे।

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