कुरान - 12:83 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

83
قَالَ بَلۡ سَوَّلَتۡ لَكُمۡ أَنفُسُكُمۡ أَمۡرٗاۖ فَصَبۡرٞ جَمِيلٌۖ عَسَى ٱللَّهُ أَن يَأۡتِيَنِي بِهِمۡ جَمِيعًاۚ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلۡعَلِيمُ ٱلۡحَكِيمُ

Transliteration: (Qaala bal sawwalat lakum anfusukum amran fasabrun jameelun 'asal laahu any yaa tiyanee bihim jamee'aa; innahoo Huwal 'Aleemul Hakeem)

याक़ूब ने कहा, "बल्कि तुम्हारे मनों ने तुम्हारे लिए एक और बात बना ली है; अतः (मेरे लिए) सुंदर सब्र (सब्र-ए-जमील) ही उत्तम है; निकट है कि अल्लाह उन सब को (यूसुफ़, बिन्यामीन और बड़े बेटे को) मेरे पास ले आए; निस्संदेह, वही पूर्ण ज्ञान वाला (अलीम), तत्वदर्शी (हकीम) है।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 83 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 83 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] हज़रत याक़ूब का अटूट भरोसा और आशा

हज़रत याक़ूब ने दूसरा गहरा सदमा सुनकर भी अपना संयम नहीं खोया। उन्होंने फिर 'सब्र-ए-जमील' का ऐलान किया और नबूवत के नूर से महसूस किया कि यह इम्तिहान का आख़िरी चरण है और बहुत जल्द अल्लाह उनके तीनों बिछड़े बेटों को उनसे मिला देगा।

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