कुरान - 12:84 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

84
وَتَوَلَّىٰ عَنۡهُمۡ وَقَالَ يَـٰٓأَسَفَىٰ عَلَىٰ يُوسُفَ وَٱبۡيَضَّتۡ عَيۡنَاهُ مِنَ ٱلۡحُزۡنِ فَهُوَ كَظِيمٞ

Transliteration: (Wa tawallaa 'anhum wa qaala yaaa asafaa 'alaa Yoosufa wabyaddat 'aynaahu minal huzni fahuwa kazeem)

और उन्होंने उनसे अपना मुँह फेर लिया और कहा, "हाय अफ़सोस यूसुफ़ पर!" और अत्यधिक दुख और रोने के कारण उनकी दोनों आँखें सफ़ेद (अंधी) हो गईं, और वे अपने दुख को अंदर ही अंदर घोंटने वाले (कज़ीम) थे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 84 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 84 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] "وَابْيَضَّتْ عَيْنَاهُ مِنَ الْحُزْنِ فَهُوَ كَظِيمٌ" – पिता के असीम विरह की पराकाष्ठा

बिन्यामीन के वियोग ने यूसुफ़ के पुराने ज़ख्मों को फिर से ताज़ा कर दिया। हज़रत याक़ूब ने मुंह फेर कर रोना शुरू किया। लगातार रोने और आंतरिक रूप से ग़म को सीने में दबाए रखने (कज़ीम) के कारण आँखों की पुतलियों पर मोतियाबिंद/सफ़ेदी छा गई और उनकी आँखों की रोशनी चली गई।

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