कुरान - 12:86 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

86
قَالَ إِنَّمَآ أَشۡكُواْ بَثِّي وَحُزۡنِيٓ إِلَى ٱللَّهِ وَأَعۡلَمُ مِنَ ٱللَّهِ مَا لَا تَعۡلَمُونَ

Transliteration: (Qaala innamaaa ashkoo bassee wa huzneee ilal laahi wa a'lamu minal laahi maa laa ta'lamoon)

उन्होंने कहा, "मैं तो अपनी बेक़रारी और अपने ग़म की फ़रियाद केवल अल्लाह ही से करता हूँ, और मैं अल्लाह की ओर से वह सब जानता हूँ जो तुम नहीं जानते।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 86 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 86 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] अल्लाह के सामने दुःख का इज़हार (शिकायत नहीं, दुआ)

हज़रत याक़ूब (अलै.) ने अपने बेटों से फ़रमाया कि मैं इंसानों के आगे नहीं रोता, बल्कि अपनी परेशानी और ग़म की पुकार केवल अपने रब के हुज़ूर करता हूँ। नबी का अल्लाह से फ़रियाद करना सब्र-ए-जमील के ख़िलाफ़ नहीं, बल्कि सच्ची इबादत और तवक्कुल है।

✅ [2] अल्लाह की रहमत और वादों पर अटूट विश्वास

उन्हें अल्लाह की वह्य और इल्हाम से यह यक़ीन था कि यूसुफ़ जीवित हैं और उनका बचपन का ख़्वाब ज़रूर पूरा होगा, जिसे उनके बेटे नहीं समझ सकते थे।

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