कुरान - 12:87 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

87
يَٰبَنِيَّ ٱذۡهَبُواْ فَتَحَسَّسُواْ مِن يُوسُفَ وَأَخِيهِ وَلَا تَاْيۡـَٔسُواْ مِن رَّوۡحِ ٱللَّهِۖ إِنَّهُۥ لَا يَاْيۡـَٔسُ مِن رَّوۡحِ ٱللَّهِ إِلَّا ٱلۡقَوۡمُ ٱلۡكَٰفِرُونَ

Transliteration: (Yaa baniyyaz haboo fatahassasoo miny Yoosufa wa akheehi wa laa tai'asoo mir rawhil laahi innahoo laa yai'asu mir rawhil laahi illal qawmul kaafiroon)

"ऐ मेरे बेटो! जाओ और यूसुफ़ और उसके भाई की खोज करो, और अल्लाह की रहमत से निराश न हो। निस्संदेह अल्लाह की रहमत से केवल इनकार करने वाले (काफ़िर) लोग ही निराश होते हैं।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 87 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 87 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] मायूसी कुफ़्र की निशानी है

हज़रत याक़ूब ने अपने बेटों को नसीहत फ़रमाई कि हरगिज़ अल्लाह की रहमत से नाउम्मीद न हों। कठिन से कठिन हालात में भी मोमिन कभी अल्लाह से मायूस नहीं होता; नाउम्मीदी केवल उन लोगों का काम है जो अल्लाह की क़ुदरत और रहमत पर ईमान नहीं रखते।

✅ [2] यूसुफ़ और बिन्यामीन की खोज का निर्देश

उन्होंने बेटों को दोबारा मिस्र भेजा ताकि दोनों भाइयों की तलाश की जा सके।

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