कुरान - 12:88 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

88
فَلَمَّا دَخَلُواْ عَلَيۡهِ قَالُواْ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلۡعَزِيزُ مَسَّنَا وَأَهۡلَنَا ٱلضُّرُّ وَجِئۡنَا بِبِضَٰعَةٖ مُّزۡجَىٰةٖ فَأَوۡفِ لَنَا ٱلۡكَيۡلَ وَتَصَدَّقۡ عَلَيۡنَآۖ إِنَّ ٱللَّهَ يَجۡزِي ٱلۡمُتَصَدِّقِينَ

Transliteration: (Falammaa dakhaloo 'alaihi qaaloo yaaa ayyuhal 'Azeezu massanaa wa ahlanad durru wa ji'naa bi bidaa 'im muzjaatin fa awfi lanal kaila wa tasaddaq 'alainaa innal laaha yajzil mutasaddiqeen)

फिर जब वे यूसुफ़ के पास पहुंचे तो बोले, "ऐ अज़ीज़! हम पर और हमारे परिवार पर बड़ी मुसीबत आ पड़ी है, और हम तुच्छ पूंजी (घटिया माल) लाए हैं; अतः हमें पूरा नाप (अनाज) दीजिए और हम पर ख़ैरात (सदक़ा) कीजिए। निस्संदेह अल्लाह सदक़ा करने वालों को उत्तम बदला देता है।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 88 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 88 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] भाइयों की लाचारी और अज़ीज़ से याचना

भाई मिस्र लौटे और अज़ीज़-ए-मिस्र (यूसुफ़) के दरबार में उपस्थित हुए। अकाल के कारण उनका परिवार अत्यधिक भुखमरी और कंगाली का शिकार था, उनके पास अनाज के बदले देने के लिए केवल कुछ मामूली और रद्दी चीज़ें थीं।

✅ [2] सदक़ा और उदारता की अपील

उन्होंने दया की भीख मांगते हुए कहा कि हमारी कम पूंजी के बावजूद हमें पूरा राशन दें और हम पर उपकार करें।

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