कुरान - 12:93 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

93
ٱذۡهَبُواْ بِقَمِيصِي هَٰذَا فَأَلۡقُوهُ عَلَىٰ وَجۡهِ أَبِي يَأۡتِ بَصِيرٗا وَأۡتُونِي بِأَهۡلِكُمۡ أَجۡمَعِينَ

Transliteration: (Izhaboo biqameesee haazaa fa alqoohu 'alaa wajhi abee ya'ti baseeranw wa'toonee bi ahlikum ajma'een)

"मेरा यह कुर्ता (क़मीस) ले जाओ और इसे मेरे पिता के चेहरे पर डाल देना, उनकी आंखों की रोशनी लौट आएगी; और अपने पूरे परिवार को मेरे पास ले आओ।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 93 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 93 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] यूसुफ़ का कुर्ता और पिता की दृष्टि की वापसी

हज़रत यूसुफ़ ने भाइयों को अपना कुर्ता दिया और फ़रमाया कि इसे वालिद मोहतरम के चेहरे पर रख देना, अल्लाह के हुक्म से उनकी बिनाई (रोशनी) बहाल हो जाएगी। यह अल्लाह का एक मोजिज़ह था।

✅ [2] पूरे ख़ानदान को मिस्र आने का निमंत्रण

उन्होंने कनान से पूरे ख़ानदान (माता-पिता, भाई और उनके बच्चों) को ससम्मान मिस्र बुलाने का आदेश दिया।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now