कुरान - 12:92 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

92
قَالَ لَا تَثۡرِيبَ عَلَيۡكُمُ ٱلۡيَوۡمَۖ يَغۡفِرُ ٱللَّهُ لَكُمۡۖ وَهُوَ أَرۡحَمُ ٱلرَّـٰحِمِينَ

Transliteration: (Qaala laa tathreeba 'alaikumul yawma yaghfirul laahu lakum wa Huwa arhamur raahimeen)

यूसुफ़ ने कहा, "आज तुम पर कोई उलाहना (दोषारोपण) नहीं है। अल्लाह तुम्हें माफ़ फ़रमाए, और वह सब दयावानों से बढ़कर दयावान है।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 92 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 92 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] क्षमा और रहमदिली की सर्वोच्च मिसाल

हज़रत यूसुफ़ ने बदला लेने की पूरी ताक़त रखने के बावजूद भाइयों को तुरंत और बिना किसी शर्त के माफ़ कर दिया। उन्होंने न कोई ताना दिया, न शर्मिंदा किया, बल्कि उनके हक़ में मग़फ़िरत की दुआ मांगी।

✅ [2] रसूलुल्लाह ﷺ द्वारा फ़तह-ए-मक्का पर यही सुन्नत दोहराना

जब नबी करीम ﷺ ने मक्का फ़तह किया और कुरैश के ज़ालिम सामने सिर झुकाए खड़े थे, तो आप ﷺ ने भी हज़रत यूसुफ़ (अलै.) के इन्हीं लफ़्ज़ों को दोहराते हुए फ़रमाया: 'ला तसरीब अलैकुमुल यौम' (आज तुम पर कोई इल्ज़ाम नहीं, जाओ तुम सब आज़ाद हो)।

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