Transliteration: (Qaala laa tathreeba 'alaikumul yawma yaghfirul laahu lakum wa Huwa arhamur raahimeen)
हज़रत यूसुफ़ ने बदला लेने की पूरी ताक़त रखने के बावजूद भाइयों को तुरंत और बिना किसी शर्त के माफ़ कर दिया। उन्होंने न कोई ताना दिया, न शर्मिंदा किया, बल्कि उनके हक़ में मग़फ़िरत की दुआ मांगी।
जब नबी करीम ﷺ ने मक्का फ़तह किया और कुरैश के ज़ालिम सामने सिर झुकाए खड़े थे, तो आप ﷺ ने भी हज़रत यूसुफ़ (अलै.) के इन्हीं लफ़्ज़ों को दोहराते हुए फ़रमाया: 'ला तसरीब अलैकुमुल यौम' (आज तुम पर कोई इल्ज़ाम नहीं, जाओ तुम सब आज़ाद हो)।
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