कुरान - 20:21 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

21
قَالَ خُذۡهَا وَلَا تَخَفۡۖ سَنُعِيدُهَا سِيرَتَهَا ٱلۡأُولَىٰ

Transliteration: (Qaala khuzhaa wa laa ta khaf sanu'eeduhaa seeratahal oolaa)

21. फ़रमाया, 'इसे पकड़ लो और डरो मत; अब हम इसे इसकी पहली हालत पर लौटा देंगे [22] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 21 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 21 की तफ़सीर

"फ़रमाया, 'इसे पकड़ लो और डरो मत; अब हम इसे इसकी पहली हालत पर लौटा देंगे [22] ।' "

[22] मौजिज़ा अल्लाह की क़ुदरत और मूसा (अलैहिस्सलाम) के दस्ते मुबारक से वाबस्ता

इससे मालूम हुआ कि असा का यह मौजिज़ा अल्लाह तआला की क़ुदरत से था, लेकिन इसका ज़हूर हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) के ख़ास असा और उनके मुबारक हाथ से वाबस्ता कर दिया गया था।

अगर कोई दूसरी लाठी हज़रत मूसा के हाथ में होती, या यही लाठी किसी और शख़्स के हाथ में होती, तो वह हरगिज़ अज़दहा न बनती।

इसीलिए ख़ास तौर पर हुक्म दिया गया: "ख़ुज़हा" यानी 'तुम इसे पकड़ लो'।

इससे यह अक़ीदा साफ़ होता है कि अल्लाह तआला अपनी बरकतें और ताक़तें अपने बरगुज़ीदा व महबूब बंदों के हाथों के ज़रिए ज़ाहिर फ़रमाता है।

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