कुरान - 20:135 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

135
وَلَوۡ أَنَّآ أَهۡلَكۡنَٰهُم بِعَذَابٖ مِّن قَبۡلِهِۦ لَقَالُواْ رَبَّنَا لَوۡلَآ أَرۡسَلۡتَ إِلَيۡنَا رَسُولٗا فَنَتَّبِعَ ءَايَٰتِكَ مِن قَبۡلِ أَن نَّذِلَّ وَنَخۡزَىٰ

Transliteration: (Qul kullum mutarabbisun fa tarabbasoo fa sa ta'lamoona man Ashaabus Siraatis Sawiyyi wa manih tadaa (section 8) (End Juz 16))

135. आप फ़रमा दीजिए, 'सब इंतज़ार कर रहे हैं, तो तुम भी इंतज़ार करो; अब तुम्हें जल्द मालूम हो जाएगा कि सीधे रास्ते वाले कौन हैं और किसने हिदायत पाई है [197] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 135 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 135 की तफ़सीर

"आप फ़रमा दीजिए, 'सब इंतज़ार कर रहे हैं, तो तुम भी इंतज़ार करो; अब तुम्हें जल्द मालूम हो जाएगा कि सीधे रास्ते वाले कौन हैं और किसने हिदायत पाई है [197] ।' "

[197] हक़ की क़तई फ़तह और बशारत

कुफ़्फ़ारे मक्का मुसलमानों की तंगदस्ती देखकर ताना देते थे कि इस्लाम जल्द ख़त्म हो जाएगा। इस आयत में अल्लाह ने फ़रमाया कि तुम भी वक़्त का इंतज़ार करो और हम भी मुंतज़िर हैं—वक़्त ने साबित कर दिया कि परचमे इस्लाम पूरी दुनिया पर लहराया और बातिल हमेशा के लिए मटियामेट हो गया।

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