कुरान - 20:132 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

132
وَأۡمُرۡ أَهۡلَكَ بِٱلصَّلَوٰةِ وَٱصۡطَبِرۡ عَلَيۡهَاۖ لَا نَسۡـَٔلُكَ رِزۡقٗاۖ نَّحۡنُ نَرۡزُقُكَۗ وَٱلۡعَٰقِبَةُ لِلتَّقۡوَىٰ

Transliteration: (Wa'mur ahlaka bis Salaati wastabir 'alaihaa laa nas'aluka rizqaa; nahnu narzuquk; wal 'aaqibatu littaqwaa)

132. और अपने घर वालों को नमाज़ का हुक्म दीजिए और ख़ुद भी उस पर साबित-क़दम रहिए [190]; हम आपसे कोई रिज़्क़ नहीं मांगते, रिज़्क़ तो हम आपको देंगे [191]; और अच्छा अंजाम परहेज़गारी ही के लिए है [192] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 132 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 132 की तफ़सीर

"और अपने घर वालों को नमाज़ का हुक्म दीजिए और ख़ुद भी उस पर साबित-क़दम रहिए [190]; हम आपसे कोई रिज़्क़ नहीं मांगते, रिज़्क़ तो हम आपको देंगे [191]; और अच्छा अंजाम परहेज़गारी ही के लिए है [192] ।"

[190] घर वालों को नमाज़ की ताकीद

सच्चा नमाज़ी वह है जो ख़ुद भी नमाज़ पढ़े और अपने अहल-ओ-अयाल (बीवी, बच्चों) को भी नमाज़ का पाबंद बनाए। बच्चों और मातहतों को सख़्ती से और अज़ीज़ों को नर्मी से ताकीद की जाए।

[191] रिज़्क़ का ज़ामिन अल्लाह है

रोज़ी की फ़िक्र में नमाज़ और इबादत को तर्क न करो। अल्लाह ही तुम्हारा और तुम्हारे बच्चों का राज़िक़ है।

[192] तक़वा और ग़ैबी रिज़्क़

जो अल्लाह से डरता है, अल्लाह उसके लिए ऐसी जगह से रिज़्क़ का इंतिज़ाम फ़रमाता है जहाँ उसका गुमान भी नहीं होता।

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