Transliteration: (Wa'mur ahlaka bis Salaati wastabir 'alaihaa laa nas'aluka rizqaa; nahnu narzuquk; wal 'aaqibatu littaqwaa)
"और अपने घर वालों को नमाज़ का हुक्म दीजिए और ख़ुद भी उस पर साबित-क़दम रहिए [190]; हम आपसे कोई रिज़्क़ नहीं मांगते, रिज़्क़ तो हम आपको देंगे [191]; और अच्छा अंजाम परहेज़गारी ही के लिए है [192] ।"
सच्चा नमाज़ी वह है जो ख़ुद भी नमाज़ पढ़े और अपने अहल-ओ-अयाल (बीवी, बच्चों) को भी नमाज़ का पाबंद बनाए। बच्चों और मातहतों को सख़्ती से और अज़ीज़ों को नर्मी से ताकीद की जाए।
रोज़ी की फ़िक्र में नमाज़ और इबादत को तर्क न करो। अल्लाह ही तुम्हारा और तुम्हारे बच्चों का राज़िक़ है।
जो अल्लाह से डरता है, अल्लाह उसके लिए ऐसी जगह से रिज़्क़ का इंतिज़ाम फ़रमाता है जहाँ उसका गुमान भी नहीं होता।
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