कुरान - 20:134 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

134
وَلَوۡ أَنَّآ أَهۡلَكۡنَٰهُم بِعَذَابٖ مِّن قَبۡلِهِۦ لَقَالُواْ رَبَّنَا لَوۡلَآ أَرۡسَلۡتَ إِلَيۡنَا رَسُولٗا فَنَتَّبِعَ ءَايَٰتِكَ مِن قَبۡلِ أَن نَّذِلَّ وَنَخۡزَىٰ

Transliteration: (Wa law annaaa ahlaknaahum bi 'azaabin min qablihee laqaaloo Rabbanaa law laaa arsalta ilainaa Rasoolan fanattabi'a Aayaatika min qabli an nazilla wa nakhzaa)

134. और अगर हम रसूल के आने से पहले ही उन्हें अज़ाब से हलाक कर देते, तो वे ज़रूर कहते कि 'ऐ हमारे रब! तूने हमारे पास कोई रसूल क्यों न भेजा [195] ताकि हम ज़लील व रुसवा होने से पहले तेरी आयतों की पैरवी कर लेते [196] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 134 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 134 की तफ़सीर

"और अगर हम रसूल के आने से पहले ही उन्हें अज़ाब से हलाक कर देते, तो वे ज़रूर कहते कि 'ऐ हमारे रब! तूने हमारे पास कोई रसूल क्यों न भेजा [195] ताकि हम ज़लील व रुसवा होने से पहले तेरी आयतों की पैरवी कर लेते [196] ।' "

[195] हुज्जत का तमाम होना

अल्लाह तआला ने अपने रसूल (ﷺ) को भेजकर कुफ़्फ़ार के हर बहाने को ख़त्म कर दिया ताकि क़ियामत के दिन वे यह उज़्र पेश न कर सकें कि हमें आगाह नहीं किया गया था।

[196] बद्र व ख़ंदक़ में रुसवाई

रसूल के आने और वाज़ेह पैग़ाम के बाद जब उन्होंने इन्कार किया, तो गजवा-ए-बद्र और ख़ंदक़ में ज़िल्लत व रुसवाई उनके हिस्से में आई।

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