कुरान - 20:133 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

133
وَقَالُواْ لَوۡلَا يَأۡتِينَا بِـَٔايَةٖ مِّن رَّبِّهِۦٓۚ أَوَلَمۡ تَأۡتِهِم بَيِّنَةُ مَا فِي ٱلصُّحُفِ ٱلۡأُولَىٰ

Transliteration: (Wa qaaloo law laa ya'teenaa bi aayatin mir Rabbih; awa lam ta'tihim baiyinatu maa fis suhufil oolaa)

133. और काफ़िर बोले, 'यह हमारे पास अपने रब की तरफ़ से कोई निशानी (मौजिज़ा) क्यों नहीं लाते [193]?' और क्या उनके पास पिछली किताबों की रौशन दलीलें नहीं आ चुकीं [194] ? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 133 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 133 की तफ़सीर

"और काफ़िर बोले, 'यह हमारे पास अपने रब की तरफ़ से कोई निशानी क्यों नहीं लाते [193]?' और क्या उनके पास पिछली किताबों की रौशन दलीलें नहीं आ चुकीं [194] ?"

[193] मुनकिरीन के बेतुके मुतालबात

वे सोने के पहाड़ बनाने या मक्के को सब्ज़ाज़ार करने जैसी ना-माक़ूल फ़रमाइशें करते थे।

[194] पिछली किताबों में हुज़ूर (ﷺ) की बशारतें

तौरात और इंजील में नबी करीम (ﷺ) की आमद की बशारतें मौजूद थीं, और आपका अज़ीम क़ुरआन ख़ुद सबसे बड़ा ज़िंदा मौजिज़ा है।

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