कुरान - 20:131 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

131
وَلَا تَمُدَّنَّ عَيۡنَيۡكَ إِلَىٰ مَا مَتَّعۡنَا بِهِۦٓ أَزۡوَٰجٗا مِّنۡهُمۡ زَهۡرَةَ ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَا لِنَفۡتِنَهُمۡ فِيهِۚ وَرِزۡقُ رَبِّكَ خَيۡرٞ وَأَبۡقَىٰ

Transliteration: (Wa laa tamuddanna 'ainaika ilaa ma matta'na biheee azwajam minhum zahratal hayaatid dunya linaftinahum feeh; wa rizqu Rabbika khairunw wa abqaa)

131. और ऐ सुनने वाले! अपनी निगाहें उन चीज़ों की तरफ़ न फैलाना जो हमने काफ़िरों के मुख़्तलिफ़ जोड़ों (गिरोहों) को बरतने के लिए दुनियावी ज़िंदगी की चमक-दमक दी हैं [188] ताकि हम उसमें उनकी आज़माइश करें; और आपके रब का दिया हुआ रिज़्क़ सबसे बेहतर और हमेशा बाक़ी रहने वाला है [189] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 131 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 131 की तफ़सीर

"और ऐ सुनने वाले! अपनी निगाहें उन चीज़ों की तरफ़ न फैलाना जो हमने काफ़िरों के मुख़्तलिफ़ जोड़ों को बरतने के लिए दुनियावी ज़िंदगी की चमक-दमक दी हैं [188] ताकि हम उसमें उनकी आज़माइश करें; और आपके रब का दिया हुआ रिज़्क़ सबसे बेहतर और हमेशा बाक़ी रहने वाला है [189] ।"

[188] काफ़िरों की दौलत पर रश्क न करना

काफ़िरों की दुनियावी दौलत दर-हक़ीक़त उनके लिए आज़माइश और इस्तेदराज (ढील) है। मोमिन को काफ़िर के माल पर नहीं बल्कि हज़रत उस्मान-ए-ग़नी (रज़ियल्लाहु अन्हु) जैसे सालेह मोमिनीन की सख़ावत और दौलत पर रश्क करना चाहिए।

[189] मोमिन का दायमी रिज़्क़

अल्लाह का अता किया हुआ हलाल रिज़्क़ और आख़िरत की नेमतें दायमी और बेमिसाल हैं जो कभी ख़त्म नहीं होंगी।

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