Transliteration: (Yafqahoo qawlee)
" 'ताकि वे मेरी बात अच्छी तरह समझ सकें [27];' "
हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने बचपन में दहकता हुआ लाल अंगारा अपने मुबारक मुंह में रख लिया था, जिसकी वजह से ज़बान में हल्की सी लुक़्नत (हकलाहट) पैदा हो गई थी।
यह वाक़िया उस वक़्त पेश आया जब वे फ़िरऔन की गोद में खेल रहे थे—उन्होंने फ़िरऔन की दाढ़ी पकड़कर उसके मुंह पर एक तमाचा मार दिया। फ़िरऔन ग़ुस्से में आग-बबूला हो गया और उन्हें क़त्ल करने का इरादा किया।
सय्यिदा आसिया (रज़ियल्लाहु अन्हा) ने उनकी हिफ़ाज़त के लिए कहा: "यह तो अभी नासमझ बच्चा है, जो सोने और आग में फ़र्क़ नहीं कर सकता।"
इम्तिहान के लिए फ़िरऔन ने सामने दो थाल रखवाए—एक में लाल याक़ूत (जवाहरात) और दूसरे में दहकते हुए अंगारे। हज़रत मूसा ने दहकता हुआ अंगारा उठाकर मुंह में रख लिया।
इसी वजह से ज़बान में लुक़्नत आई थी, चुनांचे उन्होंने दुआ फ़रमाई ताकि ज़बान बिल्कुल साफ़ हो जाए और लोग उनकी बात को अच्छी तरह समझ सकें।
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