Transliteration: (Wahlul 'uqdatan milli saanee)
" 'और मेरी ज़बान की गिरह (लुक़्नत) खोल दे [26];' "
इससे मालूम हुआ कि बहरा और गूंगा शख़्स नबूवत के मनसब के लायक़ नहीं होता, क्योंकि अल्लाह के पैग़ाम की तबलीग़ व इशाअत ज़बान और कान के इस्तेमाल के बग़ैर मुम्किन नहीं।
ज़बान की फ़साहत और रवानी अल्लाह तआला की बहुत बड़ी नेमत है, और उस ज़ात के लिए निहायत ज़रूरी सिफ़त है जिसे वही-ए-इलाही के ज़रिए क़ौम की हिदायत का काम सौंपा जाए।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat