Transliteration: (Wa ashrik hu feee amree)
" 'और उन्हें मेरे काम में शरीक फ़रमा दे [29];' "
हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने दुआ फ़रमाई कि नबूवत और तबलीग़-ए-दीन के इस अज़ीम काम में हज़रत हारून को भी शरीक फ़रमा दिया जाए, ताकि फ़िरऔन के मुक़ाबले में वे अकेले न रहें बल्कि एक मुअतमिद और बा-सलाहियत रफ़ीक़-ए-कार का सहारा हासिल रहे।
यह दीनी ज़िम्मेदारियों में मुश्तरका जद्दो-जहद की हिकमत को ज़ाहिर करता है।
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