कुरान - 20:32 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

32
وَأَشۡرِكۡهُ فِيٓ أَمۡرِي

Transliteration: (Wa ashrik hu feee amree)

32. 'और उन्हें मेरे काम में शरीक फ़रमा दे [29];' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 32 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 32 की तफ़सीर

" 'और उन्हें मेरे काम में शरीक फ़रमा दे [29];' "

[29] नबूवत और दावत-ए-दीन में शिराकत

हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने दुआ फ़रमाई कि नबूवत और तबलीग़-ए-दीन के इस अज़ीम काम में हज़रत हारून को भी शरीक फ़रमा दिया जाए, ताकि फ़िरऔन के मुक़ाबले में वे अकेले न रहें बल्कि एक मुअतमिद और बा-सलाहियत रफ़ीक़-ए-कार का सहारा हासिल रहे।

यह दीनी ज़िम्मेदारियों में मुश्तरका जद्दो-जहद की हिकमत को ज़ाहिर करता है।

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