कुरान - 20:33 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

33
كَيۡ نُسَبِّحَكَ كَثِيرٗا

Transliteration: (Kai nusabbihaka kaseeraa)

33. 'ताकि हम कसरत से तेरी पाकी बयान करें [30];' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 33 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 33 की तफ़सीर

" 'ताकि हम कसरत से तेरी पाकी बयान करें [30];' "

[30] तस्बीह बतौर इबादत और इज्तिमाई ज़िक्र की फ़ज़ीलत

यहाँ तस्बीह से मुराद अल्लाह तआला की इबादत, पाकीज़गी का बयान और दावत-ए-दीन की नश्रो-इशाअत है।

या फिर तस्बीह से मुराद नमाज़ के अंदर का ज़िक्र है, और 'ज़िक्र' से मुराद नमाज़ के बाहर का ज़िक्र है।

इससे यह भी साबित होता है कि नेक बंदों की सोहबत में मिलकर बा-जमाअत या इज्तिमाई तौर पर अल्लाह का ज़िक्र करना निहायत पसंदीदा और मुस्तहसन अमल है।

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