Transliteration: (Qaala Rabbunal lazeee a'taa kulla shai'in khalqahoo summa hadaa)
"उन्होंने फ़रमाया, 'हमारा रब वह है जिसने हर चीज़ को उसकी मुनासिब सूरत अता फ़रमाई [56], फिर हिदायत बख़्शी [57] ।' "
इसका मतलब यह है कि हर जानवर और मख़लूक़ को वही शक्लो-सूरत और आज़ा अता फ़रमाए जो उसकी ज़रूरतों के लिए मौज़ूं थे। मसलन हाथी की गर्दन छोटी रखी मगर लंबी सूंड दी, ऊंट की सूंड नहीं मगर लंबी गर्दन दी। इसी तरह हाथ और पैर की साख़्त में फ़र्क़ रखा ताकि हर अज़्व अपना काम अंजाम दे सके।
अल्लाह तआला ने दुनियावी ज़रूरतों के लिए मख़लूक़ को अक़्ल व फ़ितरी शहूर दिया, और आख़िरत की कामियाबी के लिए अंबिया-ए-किराम और आसमानी किताबें नाज़िल फ़रमाईं।
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