कुरान - 20:52 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

52
قَالَ عِلۡمُهَا عِندَ رَبِّي فِي كِتَٰبٖۖ لَّا يَضِلُّ رَبِّي وَلَا يَنسَى

Transliteration: (Qaala 'ilmuhaa 'inda Rabee fee kitaab, laa yadillu Rabbee wa laa yansaa)

52. फ़रमाया, 'उनका इल्म मेरे रब के पास एक किताब (लौहे महफ़ूज़) में दर्ज है [59]; मेरा रब न बहकता है और न भूलता है [60] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 52 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 52 की तफ़सीर

"फ़रमाया, 'उनका इल्म मेरे रब के पास एक किताब में दर्ज है [59]; मेरा रब न बहकता है और न भूलता है [60] ।' "

[59] लौहे महफ़ूज़ में सारा रिकॉर्ड महफ़ूज़

हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने बेख़बरी की वजह से टाल-मटोल नहीं की, बल्कि इसलिए कि वे फ़िरऔन की चाल में आकर असल मक़सद से भटकना नहीं चाहते थे। उनका तमाम रिकॉर्ड लौहे महफ़ूज़ में पूरी तरह महफ़ूज़ है।

[60] भूल-चूक से अल्लाह की पाकीज़गी

किताब में लिखना किसी भूल के डर से नहीं, बल्कि अपने मुक़र्रब बंदों और फ़रिश्तों पर हक़ायक़ ज़ाहिर करने के लिए है। अल्लाह की ज़ात हर भूल और ख़ता से पाक है।

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