कुरान - 20:54 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

54
كُلُواْ وَٱرۡعَوۡاْ أَنۡعَٰمَكُمۡۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٖ لِّأُوْلِي ٱلنُّهَىٰ

Transliteration: (Kuloo war'aw an'aamakum; inna fee zaalika la Aayaatil li ulin nuhaa (section 2))

54. 'ख़ुद खाओ और अपने मवेशियों को चराओ [63]; बेशक इसमें अक़्ल वालों के लिए बड़ी निशानियां हैं।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 54 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 54 की तफ़सीर

" 'ख़ुद खाओ और अपने मवेशियों को चराओ [63]; बेशक इसमें अक़्ल वालों के लिए बड़ी निशानियां हैं।' "

[63] नेमतों की इजाज़त और इबादत की ज़िम्मेदारी

यह हुक्म नेमतों के इस्तेमाल की इजाज़त के लिए है। इसका मफ़हूम यह है कि जब हमने तुम्हारे फ़ायदे के लिए यह तमाम रिज़्क़ पैदा किया है, तो अब तुम्हारा भी यह फ़र्ज़ है कि हमारे लिए इबादत और शुक्रगुज़ारी करो।

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