Transliteration: (Minhaa khalaqnaakum wa feehaa nu'eedukum wa minhaa nukhrijukum taaratan ukhraa)
" 'उसी ज़मीन से हमने तुम्हें पैदा किया, और उसी में तुम्हें वापस लौटाएंगे [64], और उसी से तुम्हें दोबारा बाहर निकालेंगे।' "
इंसान चाहे दफ़न किया जाए, जलाया जाए, या दरिंदे उसे खा जाएं, उसके अस्ल अज़्ज़ा ज़मीन ही में वापस पहुंचते हैं। यहाँ तक कि जो समंदर में डूबकर मछलियों का लुक़्मा बने, वह भी ज़मीन ही पर है क्योंकि समंदर का पानी भी ज़मीन ही पर ठहरा हुआ है।
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