कुरान - 20:55 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

55
۞مِنۡهَا خَلَقۡنَٰكُمۡ وَفِيهَا نُعِيدُكُمۡ وَمِنۡهَا نُخۡرِجُكُمۡ تَارَةً أُخۡرَىٰ

Transliteration: (Minhaa khalaqnaakum wa feehaa nu'eedukum wa minhaa nukhrijukum taaratan ukhraa)

55. 'उसी ज़मीन से हमने तुम्हें पैदा किया, और उसी में तुम्हें वापस लौटाएंगे [64], और उसी से तुम्हें दोबारा बाहर निकालेंगे।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 55 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 55 की तफ़सीर

" 'उसी ज़मीन से हमने तुम्हें पैदा किया, और उसी में तुम्हें वापस लौटाएंगे [64], और उसी से तुम्हें दोबारा बाहर निकालेंगे।' "

[64] मौत के बाद ज़मीन की तरफ़ वापसी

इंसान चाहे दफ़न किया जाए, जलाया जाए, या दरिंदे उसे खा जाएं, उसके अस्ल अज़्ज़ा ज़मीन ही में वापस पहुंचते हैं। यहाँ तक कि जो समंदर में डूबकर मछलियों का लुक़्मा बने, वह भी ज़मीन ही पर है क्योंकि समंदर का पानी भी ज़मीन ही पर ठहरा हुआ है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now