कुरान - 20:56 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

56
وَلَقَدۡ أَرَيۡنَٰهُ ءَايَٰتِنَا كُلَّهَا فَكَذَّبَ وَأَبَىٰ

Transliteration: (Wa laqad arainaahu Aayaatinaa kullahaa fakaz zaba wa abaa)

56. और बेशक हमने फ़िरऔन को अपनी सब निशानियां दिखाईं [65], फिर भी उसने झुठलाया और इन्कार किया [66] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 56 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 56 की तफ़सीर

"और बेशक हमने फ़िरऔन को अपनी सब निशानियां दिखाईं [65], फिर भी उसने झुठलाया और इन्कार किया [66] ।"

[65] नबियों के अफ़आल अल्लाह के अफ़आल हैं

मौजिज़ात हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) के मुबारक हाथों से ज़ाहिर हुए, लेकिन अल्लाह तआला ने फ़रमाया: "हमने दिखाईं।" इससे साबित होता है कि अंबिया-ए-किराम के अफ़आल दर-हक़ीक़त अल्लाह ही के हुक्म और कुदरत से होते हैं।

[66] खुली निशानियों के बावजूद इन्कार

फ़िरऔन ने मौजिज़ात को जादू और हज़रत मूसा को जादूगर कहकर हक़ का इन्कार कर दिया। जो शख्स नबी की रहनुमाई से महरूम रह जाए, उसे दुनिया की कोई ताक़त हिदायत नहीं दे सकती।

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