कुरान - 20:48 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

48
إِنَّا قَدۡ أُوحِيَ إِلَيۡنَآ أَنَّ ٱلۡعَذَابَ عَلَىٰ مَن كَذَّبَ وَتَوَلَّىٰ

Transliteration: (Innaa qad oohiya ilainaaa annnal 'azaaba 'alaa man kaz zaba wa tawalla)

48. 'बेशक हमारी तरफ़ वही भेजी गई है कि अज़ाब उसी पर है जो झुठलाए और मुंह फेरे [54] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 48 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 48 की तफ़सीर

" 'बेशक हमारी तरफ़ वही भेजी गई है कि अज़ाब उसी पर है जो झुठलाए और मुंह फेरे [54] ।' "

[54] फ़िरऔन को ईमान की दावत और हामान की गुमराही

हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने फ़िरऔन को ईमान लाने की सूरत में वादा फ़रमाया कि:

  • तुम्हें कभी बुढ़ापा नहीं आएगा,

  • तुम्हारी सल्तनत हमेशा तुम्हारे पास क़ायम रहेगी,

  • मौत तक ऐश व आराम और लज़ीज़ नेमतें हासिल रहेंगी,

  • और मरने के बाद जन्नत नसीब होगी।

फ़िरऔन ईमान लाने के लिए क़रीब-क़रीब तैयार हो चुका था, लेकिन उसके वज़ीर हामान ने उसे भड़का दिया कि: "कल तक तुम ख़ुदा बनकर पूजे जाते थे, क्या आज बंदा बनकर दूसरों की बंदगी करोगे?" हामान के बहकावे में आकर बदबख़्त फ़िरऔन ने ईमान क़बूल करने से साफ़ इन्कार कर दिया (ख़ज़ाइनुल इरफ़ान)।

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