Transliteration: (Qaala laa takhaafaaa innanee ma'akumaa asma'u wa araa)
"फ़रमाया, 'डरो मत! मैं तुम्हारे साथ हूँ, सुनता और देखता हूँ [50] ।' "
इसका मतलब यह है कि "मेरी ख़ास मदद और नुसरत तुम्हारे साथ है।" अल्लाह तआला अपने नबियों की हिफ़ाज़त और निगरानी अपनी ख़ास सिफ़ात (समाअत व बसीरत) से फ़रमाता है।
बुज़ुर्गाने दीन फ़रमाते हैं कि अल्लाह के नबी बारगाह-ए-इलाही में क़ुर्बत और वसीले का सबसे अज़ीम ज़रिया हैं, जैसा कि सूरह निसा (आयत 64) में फ़रमाया कि जब वे अपनी जानों पर ज़ुल्म करें तो ऐ महबूब! आपकी बारगाह में हाज़िर होकर अल्लाह से बख़्शिश मांगें और रसूल उनकी शफ़ाअत फ़रमाएं।
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