कुरान - 20:46 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

46
قَالَ لَا تَخَافَآۖ إِنَّنِي مَعَكُمَآ أَسۡمَعُ وَأَرَىٰ

Transliteration: (Qaala laa takhaafaaa innanee ma'akumaa asma'u wa araa)

46. फ़रमाया, 'डरो मत! मैं तुम्हारे साथ हूँ, सुनता और देखता हूँ [50] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 46 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 46 की तफ़सीर

"फ़रमाया, 'डरो मत! मैं तुम्हारे साथ हूँ, सुनता और देखता हूँ [50] ।' "

[50] मइय्यत-ए-इलाही: नबियों के साथ अल्लाह की ख़ास मदद

इसका मतलब यह है कि "मेरी ख़ास मदद और नुसरत तुम्हारे साथ है।" अल्लाह तआला अपने नबियों की हिफ़ाज़त और निगरानी अपनी ख़ास सिफ़ात (समाअत व बसीरत) से फ़रमाता है।

बुज़ुर्गाने दीन फ़रमाते हैं कि अल्लाह के नबी बारगाह-ए-इलाही में क़ुर्बत और वसीले का सबसे अज़ीम ज़रिया हैं, जैसा कि सूरह निसा (आयत 64) में फ़रमाया कि जब वे अपनी जानों पर ज़ुल्म करें तो ऐ महबूब! आपकी बारगाह में हाज़िर होकर अल्लाह से बख़्शिश मांगें और रसूल उनकी शफ़ाअत फ़रमाएं।

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