Transliteration: (Faqoolaa lahoo qawlal laiyinal la allahoo yatazakkkaru 'aw yakhshaa)
" 'फिर उससे नर्म बात कहना [47], शायद वह नसीहत क़बूल करे या कुछ डरे [48] ।' "
अगरचे हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) को फ़िरऔन से नर्मी से बात करने का हुक्म हुआ, लेकिन हमारे प्यारे नबी (ﷺ) को फ़रमाया गया: "ऐ नबी! काफ़िरों और मुनाफ़िक़ों पर जिहाद करो और उन पर सख़्ती फ़रमाओ" (सूरह तहरीम, आयत 9)।
इसकी हिकमत यह है कि हुज़ूर (ﷺ) का मिज़ाज-ए-मुबारक सरापा रहमत व नर्मी था, जबकि हज़रत मूसा का मिज़ाज जलाल वाला था। इसके अलावा फ़िरऔन ने हज़रत मूसा को पाला था, इसलिए उसके एहसान की रियायत में भी नर्मी की हिदायत फ़रमाई गई।
यहाँ 'शायद वह डरे' इंसानी एतबार से है, क्योंकि अल्लाह तआला को पहले से इल्म था कि फ़िरऔन कुफ़्र पर ही मरेगा। लेकिन तबलीग़ और हुज्जत पूरी करने का उसूल यही है कि बात नर्मी और उम्मीद के साथ पेश की जाए।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat