Transliteration: (Izhab anta wa akhooka bi Aayaatee wa laa taniyaa fee zikree)
" 'तुम और तुम्हारे भाई दोनों मेरी निशानियां लेकर जाओ और मेरे ज़िक्र में सुस्ती न करना [46] ।' "
यह हुक्म वाज़ेह करता है कि इलाही मिशन और दावत-ए-दीन में अल्लाह का ज़िक्र रीढ़ की हड्डी है।
अल्लाह का ज़िक्र हर तरह की मुश्किलात, ख़ौफ़ और मसाइब में दिली सुकून, रूहानी ताक़त और यक़ीन-ए-कामिल अता करता है।
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