कुरान - 20:42 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

42
ٱذۡهَبۡ أَنتَ وَأَخُوكَ بِـَٔايَٰتِي وَلَا تَنِيَا فِي ذِكۡرِي

Transliteration: (Izhab anta wa akhooka bi Aayaatee wa laa taniyaa fee zikree)

42. 'तुम और तुम्हारे भाई दोनों मेरी निशानियां लेकर जाओ और मेरे ज़िक्र में सुस्ती न करना [46] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 42 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 42 की तफ़सीर

" 'तुम और तुम्हारे भाई दोनों मेरी निशानियां लेकर जाओ और मेरे ज़िक्र में सुस्ती न करना [46] ।' "

[46] ज़िक्र-ए-इलाही: मुश्किलात में क़ुव्वत और तसल्ली का ज़रिया

यह हुक्म वाज़ेह करता है कि इलाही मिशन और दावत-ए-दीन में अल्लाह का ज़िक्र रीढ़ की हड्डी है।

अल्लाह का ज़िक्र हर तरह की मुश्किलात, ख़ौफ़ और मसाइब में दिली सुकून, रूहानी ताक़त और यक़ीन-ए-कामिल अता करता है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now