Transliteration: (Wastana' tuka linafsee)
" 'और मैंने तुम्हें ख़ास अपने लिए चुना (और तैयार किया) है [45] ।' "
इससे मालूम हुआ कि इंसानों की पैदाइश के मक़ासिद अलग-अलग हैं।
अंबिया-ए-किराम की तख़्लीक़ ख़ास अल्लाह तआला के लिए होती है, जबकि बाक़ी इंसान इबादत के लिए पैदा किए गए हैं जैसा कि फ़रमाया: "और मैंने जिन्नों और इंसानों को सिर्फ़ अपनी इबादत के लिए पैदा किया" (सूरह ज़ारियात, आयत 56)।
अल्लाह की इबादत के लिए होना और ख़ास अल्लाह के लिए होना—इन दोनों में ज़मीन व आसमान का फ़र्क़ है।
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