Transliteration: ('Aniqzifeehi fit Taabooti faqzifeehi fil yammi fal yul qihil yammu bis saahili ya'khuzhu 'aduwwul lee wa 'aduwwul lah; wa alqaitu 'alaika mahabbatan minnee wa litusna'a 'alaa 'ainee)
" 'कि इस बच्चे को संदूक़ में रख दो, फिर उस संदूक़ को दरिया में डाल दो, तो दरिया उसे किनारे पर डाल देगा [35], जहाँ उसे वह शख़्स उठा लेगा जो मेरा दुश्मन [36] और उसका भी दुश्मन है; और मैंने तुम पर अपनी तरफ़ से मुहब्बत डाल दी [37] और ताकि तुम्हारी परवरिश मेरी निगाह के सामने की जाए [38] ।' "
यह हुक्म बशारत और ख़बर पर मुश्तमिल था कि दरिया बच्चे को ब-हिफ़ाज़त किनारे लगा देगा। हज़रत मूसा की वालिदा (यूहाइज़) को बतला दिया गया था कि उनका बेटा दरिया में डूबेगा नहीं बल्कि फ़िरऔन के महल तक सलामती से पहुंचेगा।
चुनांचे उन्होंने सानूम बढ़ई से एक संदूक़ बनवाया, उसमें रुई बिछाई और बच्चे को लिटाकर दरिया-ए-नील में बहा दिया। दरिया की एक नहर फ़िरऔन के महल के बाग़ से गुज़रती थी, संदूक़ वहीं जा पहुँचा। फ़िरऔन और हज़रत आसिया ने जब संदूक़ खोला तो बच्चे को देखते ही दिल में शदीद मुहब्बत पैदा हो गई।
क़ुदरत की हिकमत देखिए कि जिस फ़िरऔन ने अपनी हुकूमत बचाने के लिए अस्सी हज़ार बनी इस्राईली मासूम बच्चों को ज़ब्ह करवाया था, उसी के हाथों अपने तख़्तो-ताज को ख़त्म करने वाले की परवरिश करवाई गई।
इससे मालूम हुआ कि अल्लाह के नेक बंदों और नबियों से दुश्मनी रखना दर-हक़ीक़त अल्लाह से दुश्मनी मोल लेना है। इसी तरह जो अल्लाह के महबूबों से मुहब्बत करता है, अल्लाह उससे मुहब्बत फ़रमाता है।
इससे साबित हुआ कि मख़लूक़ के दिलों में किसी की अज़मत व मुहब्बत का बैठ जाना अल्लाह की तरफ़ से नबियों को दिया गया मौजिज़ा होता है। हमारे प्यारे नबी (ﷺ) से पूरी दुनिया के मोमिनीन की बेपनाह मुहब्बत भी इसी मौजिज़े का ज़हूर है।
आम इंसान अपने वालिदैन की निगरानी में पलते हैं, लेकिन अल्लाह के ख़ास बरगुज़ीदा बंदों की परवरिश ख़ुद अल्लाह तआला अपनी ख़ास नज़र और हिफ़ाज़त में फ़रमाता है।
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