Transliteration: (Qaalaa Rabbanaaa innanaa nakhaafu ai yafruta 'alainaaa aw ai yatghaa)
"उन दोनों ने अर्ज़ किया, 'ऐ हमारे रब! बेशक हमें डर है कि वह हम पर ज़्यादती करे [49] या अपनी सरकशी में आगे बढ़ जाए।' "
इससे मालूम हुआ कि ख़तरनाक दुश्मनों, दरिंदों या ज़ालिमों से फ़ितरी अंदेशा या ख़ौफ़ महसूस करना नबूवत की शान के ख़िलाफ़ नहीं है और न ही यह तवक्कुल के मुनाफ़ी है।
क़ुरआन में जहाँ फ़रमाया गया कि "उन पर कोई ख़ौफ़ नहीं", उससे मुराद क़ियामत का अज़ाब या वह ख़ौफ़ है जो इंसान को अल्लाह के रास्ते से भटका दे। जिस्मानी तकलीफ़ का फ़ितरी एहसास इंसानियत का तक़ाज़ा है।
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