कुरान - 20:90 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

90
وَلَقَدۡ قَالَ لَهُمۡ هَٰرُونُ مِن قَبۡلُ يَٰقَوۡمِ إِنَّمَا فُتِنتُم بِهِۦۖ وَإِنَّ رَبَّكُمُ ٱلرَّحۡمَٰنُ فَٱتَّبِعُونِي وَأَطِيعُوٓاْ أَمۡرِي

Transliteration: (Wa laqad qaala lahum Haaroonu min qablu yaa qawmi innamaa futintum bihee wa inna Rabbakumur Rahmaanu fattabi'oonee wa atee'ooo amree)

90. और बेशक हारून ने उनसे पहले ही कह दिया था कि 'ऐ मेरी क़ौम! तुम इसके ज़रिये सिर्फ़ आज़माइश में डाले गए हो, और बेशक तुम्हारा रब तो निहायत मेहरबान (रहमान) है [127]; लिहाज़ा मेरी पैरवी करो और मेरा हुक्म मानो [128] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 90 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 90 की तफ़सीर

"और बेशक हारून ने उनसे पहले ही कह दिया था कि 'ऐ मेरी क़ौम! तुम इसके ज़रिये सिर्फ़ आज़माइश में डाले गए हो, और बेशक तुम्हारा रब तो निहायत मेहरबान है [127]; लिहाज़ा मेरी पैरवी करो और मेरा हुक्म मानो [128] ।' "

[127] रहमान का नाम लेकर तौबा की तरग़ीब

हज़रत हारून (अलैहिस्सलाम) ने 'रहमान' का नाम लेकर याद दिलाया कि तुम्हारा रब निहायत बख़्शने वाला है, अगर तुम अभी इस शिर्क से बाज़ आ जाओ तो वह तुम्हें माफ़ फ़रमा देगा।

[128] नबी की इताअत की फ़र्ज़ियत

हज़रत हारून ने फ़रमाया: "मेरी पैरवी करो और मेरा हुक्म मानो।" इससे साबित हुआ कि अल्लाह की इताअत नबी की इताअत के बग़ैर मुम्किन नहीं।

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