Transliteration: (Fa akhraja lahum 'ijlan jasadal lahoo khuwaarun faqaaloo haazaaa ilaahukum wa ilaahu Moosaa fanasee)
"फिर उसने उनके लिए एक बछड़ा निकाला, बे-जान जिस्म [124] जिसमें से गाय की आवाज़ निकलती थी; तो वे बोले, 'यह तुम्हारा माबूद है और मूसा का भी माबूद है, मगर मूसा भूल गए [125] ।' "
यह आवाज़ किसी खोखली नली या सीटी की वजह से नहीं थी, बल्कि हज़रत जिब्रील (अलैहिस्सलाम) के घोड़े के सुम की ख़ाक की तासीर से उस बे-जान सोने के बछड़े से गाय जैसी आवाज़ पैदा हो गई थी।
मुनकिरीन ने कहा कि मूसा अपने ख़ुदा को ढूंढने कोहे तूर चले गए और भूल गए, जबकि ख़ुदा तो यहीं है! यह उनकी शदीद जहालत और गुमराही का मुज़ाहिरा था।
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