कुरान - 20:88 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

88
فَأَخۡرَجَ لَهُمۡ عِجۡلٗا جَسَدٗا لَّهُۥ خُوَارٞ فَقَالُواْ هَٰذَآ إِلَٰهُكُمۡ وَإِلَٰهُ مُوسَىٰ فَنَسِيَ

Transliteration: (Fa akhraja lahum 'ijlan jasadal lahoo khuwaarun faqaaloo haazaaa ilaahukum wa ilaahu Moosaa fanasee)

88. फिर उसने उनके लिए एक बछड़ा निकाला, बे-जान जिस्म [124] जिसमें से गाय की आवाज़ निकलती थी; तो वे बोले, 'यह तुम्हारा माबूद है और मूसा का भी माबूद है, मगर मूसा भूल गए [125] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 88 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 88 की तफ़सीर

"फिर उसने उनके लिए एक बछड़ा निकाला, बे-जान जिस्म [124] जिसमें से गाय की आवाज़ निकलती थी; तो वे बोले, 'यह तुम्हारा माबूद है और मूसा का भी माबूद है, मगर मूसा भूल गए [125] ।' "

[124] बछड़े की आवाज़ की हक़ीक़त

यह आवाज़ किसी खोखली नली या सीटी की वजह से नहीं थी, बल्कि हज़रत जिब्रील (अलैहिस्सलाम) के घोड़े के सुम की ख़ाक की तासीर से उस बे-जान सोने के बछड़े से गाय जैसी आवाज़ पैदा हो गई थी।

[125] गुमराही का बदतरीन दावा

मुनकिरीन ने कहा कि मूसा अपने ख़ुदा को ढूंढने कोहे तूर चले गए और भूल गए, जबकि ख़ुदा तो यहीं है! यह उनकी शदीद जहालत और गुमराही का मुज़ाहिरा था।

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