कुरान - 20:87 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

87
قَالُواْ مَآ أَخۡلَفۡنَا مَوۡعِدَكَ بِمَلۡكِنَا وَلَٰكِنَّا حُمِّلۡنَآ أَوۡزَارٗا مِّن زِينَةِ ٱلۡقَوۡمِ فَقَذَفۡنَٰهَا فَكَذَٰلِكَ أَلۡقَى ٱلسَّامِرِيُّ

Transliteration: (Qaaloo maaa akhlafnaa maw'idaka bimalkinna wa laakinna hummilnaaa awzaaram min zeenatil qawmi faqazafnaahaa fakazaalika alqas Saamiriyy)

87. वे बोले, 'हमने अपनी ख़ुशी से आपके वादे के ख़िलाफ़ नहीं किया [120], बल्कि हमसे उस क़ौम (मिस्रियों) के ज़ेवरात के बोझ उठवा लिए गए थे [121]; तो हमने उन्हें (आग में) फेंक दिया [122], फिर इसी तरह सामरी ने भी डाला [123] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 87 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 87 की तफ़सीर

"वे बोले, 'हमने अपनी ख़ुशी से आपके वादे के ख़िलाफ़ नहीं किया [120], बल्कि हमसे उस क़ौम के ज़ेवरात के बोझ उठवा लिए गए थे [121]; तो हमने उन्हें फेंक दिया [122], फिर इसी तरह सामरी ने भी डाला [123] ।' "

[120] सामरी के बहकावे का एतराफ़

क़ौम ने अर्ज़ किया कि सामरी ने ऐसी चाल चली कि हमारी अक़्लें मारी गईं और हम बहक गए।

[121] मिस्री ज़ेवरात का बोझ

यह वे सोने के ज़ेवरात थे जो बनी इस्राईल ने मिस्र से निकलते वक़्त क़िब्तियों से मांगे थे, जो उनके लिए रूहानी व अख़लाक़ी बोझ बन गए।

[122] ज़ालिमों के माल की तासीर

फ़िरऔन के डूबने के बाद यह सोना उनका हो चुका था, मगर तौरात के हुक्म के तहत उन्होंने उसे पिघलाने के लिए आग में फेंक दिया। ज़ालिमों का माल फ़ित्ने का सबब बना।

[123] सामरी का फ़ित्ना

सामरी सुनार था और क़ौम का बा-असर शख़्स था, उसने लोगों के सोने से बछड़ा ढालकर बड़ा फ़ित्ना खड़ा कर दिया।

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