कुरान - 20:89 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

89
أَفَلَا يَرَوۡنَ أَلَّا يَرۡجِعُ إِلَيۡهِمۡ قَوۡلٗا وَلَا يَمۡلِكُ لَهُمۡ ضَرّٗا وَلَا نَفۡعٗا

Transliteration: (Afalaa yarawna allaa yarji'u ilaihim qawlanw wa laa yamliku lahum darranw wa laa naf'aa (section 4))

89. तो क्या वे नहीं देखते कि वह उनकी किसी बात का जवाब नहीं देता [126], और न उनके किसी नुक़सान का इख़्तियार रखता है और न नफ़े का? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 89 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 89 की तफ़सीर

"तो क्या वे नहीं देखते कि वह उनकी किसी बात का जवाब नहीं देता [126], और न उनके किसी नुक़सान का इख़्तियार रखता है और न नफ़े का?"

[126] बुत-परस्ती का रद्द

अल्लाह तआला ने फ़रमाया कि अक़्ल के अंधों को इतना भी नहीं सूझता कि यह सोने का बे-जान पुतला न तुम्हारी पुकार सुन सकता है और न तुम्हें कोई फ़ायदा या नुक़सान पहुँचा सकता है। माबूद वही हो सकता है जो ब-ज़ाते ख़ुद हर चीज़ का मालिक और मुख़्तार हो।

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