Transliteration: (Afalaa yarawna allaa yarji'u ilaihim qawlanw wa laa yamliku lahum darranw wa laa naf'aa (section 4))
"तो क्या वे नहीं देखते कि वह उनकी किसी बात का जवाब नहीं देता [126], और न उनके किसी नुक़सान का इख़्तियार रखता है और न नफ़े का?"
अल्लाह तआला ने फ़रमाया कि अक़्ल के अंधों को इतना भी नहीं सूझता कि यह सोने का बे-जान पुतला न तुम्हारी पुकार सुन सकता है और न तुम्हें कोई फ़ायदा या नुक़सान पहुँचा सकता है। माबूद वही हो सकता है जो ब-ज़ाते ख़ुद हर चीज़ का मालिक और मुख़्तार हो।
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