कुरान - 20:85 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

85
قَالَ فَإِنَّا قَدۡ فَتَنَّا قَوۡمَكَ مِنۢ بَعۡدِكَ وَأَضَلَّهُمُ ٱلسَّامِرِيُّ

Transliteration: (Qaala fa innaa qad fatannaa qawmaka mim ba'dika wa adallahumus Saamiriyy)

85. फ़रमाया, 'तो बेशक हमने तुम्हारे पीछे तुम्हारी क़ौम को आज़माइश में डाल दिया [114] और सामरी ने उन्हें गुमराह कर दिया [115] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 85 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 85 की तफ़सीर

"फ़रमाया, 'तो बेशक हमने तुम्हारे पीछे तुम्हारी क़ौम को आज़माइश में डाल दिया [114] और सामरी ने उन्हें गुमराह कर दिया [115] ।' "

[114] नबी की ग़ैर-मौजूदगी में आज़माइश

हज़रत मूसा की ग़ैर-मौजूदगी में क़ौम की आज़माइश हुई। इससे मालूम हुआ कि क़ौमें अक्सर रहनुमा की ग़ैर-हाज़िरी में आज़माई जाती हैं।

[115] सामरी का बछड़ा और फ़ित्ना

सामरी ने सोने का बछड़ा बनाकर क़ौम को बहका दिया। चूंकि वह इस फ़ित्ने का अस्ल सबब था, इसलिए गुमराही की निस्बत उसी की तरफ़ की गई।

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