Transliteration: (Wa maaa a'jalaka 'an qawmika yaa Moosa)
" 'और ऐ मूसा! तुम्हें अपनी क़ौम से आगे आने में किस चीज़ ने जल्दी करवाई?' [112]"
हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) सत्तर चुनिंदा अफ़राद को लेकर कोहे तूर की तरफ़ चले थे। जब पहाड़ क़रीब आया तो दीदारे इलाही और कलामे रब्बानी के बेपनाह शौक़ में वे अवाम को पीछे छोड़कर आगे बढ़ आए। अल्लाह ने दरयाफ़्त फ़रमाया ताकि उनकी शफ़क़त व मुहब्बत दुनिया पर ज़ाहिर हो।
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