कुरान - 20:81 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

81
كُلُواْ مِن طَيِّبَٰتِ مَا رَزَقۡنَٰكُمۡ وَلَا تَطۡغَوۡاْ فِيهِ فَيَحِلَّ عَلَيۡكُمۡ غَضَبِيۖ وَمَن يَحۡلِلۡ عَلَيۡهِ غَضَبِي فَقَدۡ هَوَىٰ

Transliteration: (Kuloo min taiyibaati maa razaqnaakum wa laa tatghaw feehi fa yahilla 'alaikum ghadabee wa mai yahlil 'alaihi ghadabee faqad hawaa)

81. 'जो पाकीज़ा रिज़्क़ हमने तुम्हें दिया है उसमें से खाओ और इसमें हद से न बढ़ो [108] कि तुम पर मेरा ग़ज़ब नाज़िल हो, और जिस पर मेरा ग़ज़ब नाज़िल हुआ वह नीचे गिर पड़ा [109] (हलाक हो गया)।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 81 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 81 की तफ़सीर

" 'जो पाकीज़ा रिज़्क़ हमने तुम्हें दिया है उसमें से खाओ और इसमें हद से न बढ़ो [108] कि तुम पर मेरा ग़ज़ब नाज़िल हो, और जिस पर मेरा ग़ज़ब नाज़िल हुआ वह नीचे गिर पड़ा [109] ।' "

[108] हद से बढ़ने की मुमानअत

हद से बढ़ने से मुराद यह था कि मन्न व सलवा को कल के लिए ज़ख़ीरा न करो, नेमतें पाकर गुनाह न करो, और आपस में झगड़ा व फ़साद न करो।

[109] ग़ज़बे इलाही का अंजाम

जिस पर अल्लाह का ग़ज़ब टूट पड़े, वह इज़्ज़त व क़ुर्बत की बुलंदियों से गिरकर ज़िल्लत व हलाकत की गहराइयों में जा गिरता है।

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