Transliteration: (Kuloo min taiyibaati maa razaqnaakum wa laa tatghaw feehi fa yahilla 'alaikum ghadabee wa mai yahlil 'alaihi ghadabee faqad hawaa)
" 'जो पाकीज़ा रिज़्क़ हमने तुम्हें दिया है उसमें से खाओ और इसमें हद से न बढ़ो [108] कि तुम पर मेरा ग़ज़ब नाज़िल हो, और जिस पर मेरा ग़ज़ब नाज़िल हुआ वह नीचे गिर पड़ा [109] ।' "
हद से बढ़ने से मुराद यह था कि मन्न व सलवा को कल के लिए ज़ख़ीरा न करो, नेमतें पाकर गुनाह न करो, और आपस में झगड़ा व फ़साद न करो।
जिस पर अल्लाह का ग़ज़ब टूट पड़े, वह इज़्ज़त व क़ुर्बत की बुलंदियों से गिरकर ज़िल्लत व हलाकत की गहराइयों में जा गिरता है।
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