Transliteration: (Wa innee la Ghaffaarul liman taaba wa aamana wa 'amila saalihan summah tadaa)
" 'और बेशक मैं उस शख़्स के लिए बहुत बख़्शने वाला हूँ जिसने तौबा की [110] और ईमान लाया और नेक काम किए, फिर हिदायत पर क़ायम रहा [111] ।' "
कुफ़्र से तौबा ईमान लाकर, गुनाहों से तौबा इस्तिग़फ़ार करके, और बंदों के हुक़ूक़ की तौबा हक़दार का हक़ अदा करके ही पूरी होती है।
हज़रत साबित बनानी और हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) फ़रमाते हैं कि हिदायत पर क़ायम रहने से मुराद नबी करीम (ﷺ) के अहले बैत से मुहब्बत और वफ़ादारी पर क़ायम रहना है (सवाइक़े मुहर्रिक़ा)।
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