Transliteration: (wa adalla fir'awnu qawmahoo wa maa hadaa)
"और फ़िरऔन ने अपनी क़ौम को गुमराह किया और उन्हें सीधा रास्ता न दिखाया [104] ।"
यह आयत वाज़ेह करती है कि फ़िरऔन और उसके पैरोकार कुफ़्र की हालत में ही ग़र्क़ हुए। डूबते वक़्त उसका कलमा पढ़ना नाक़ाबिला क़बूल था क्योंकि मौत के वक़्त का ईमान मोतबर नहीं होता।
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