कुरान - 20:94 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

94
قَالَ يَبۡنَؤُمَّ لَا تَأۡخُذۡ بِلِحۡيَتِي وَلَا بِرَأۡسِيٓۖ إِنِّي خَشِيتُ أَن تَقُولَ فَرَّقۡتَ بَيۡنَ بَنِيٓ إِسۡرَـٰٓءِيلَ وَلَمۡ تَرۡقُبۡ قَوۡلِي

Transliteration: (Qaala yabna'umma laa ta'khuz bi lihyatee wa laa bi ra'see innee khasheetu an taqoola farraqta baina Baneee Israaa'eela wa lam tarqub qawlee)

94. हारून बोले, 'ऐ मेरी माँ के बेटे! न मेरी दाढ़ी पकड़िए [131] और न मेरे सर के बाल; मुझे डर हुआ कि कहीं आप यह न फ़रमाएं कि 'तुमने बनी इस्राईल में फूट डाल दी [132] और मेरी बात का इंतज़ार न किया [133] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 94 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 94 की तफ़सीर

"हारून बोले, 'ऐ मेरी माँ के बेटे! न मेरी दाढ़ी पकड़िए [131] और न मेरे सर के बाल; मुझे डर हुआ कि कहीं आप यह न फ़रमाएं कि 'तुमने बनी इस्राईल में फूट डाल दी [132] और मेरी बात का इंतज़ार न किया [133] ।' "

[131] दाढ़ी मुबारक और अंबिया की सुन्नत

हज़रत हारून ने नर्मी से 'ऐ मेरी माँ के बेटे' कहकर ख़िताब किया। इससे साबित हुआ कि मुट्ठी भर दाढ़ी रखना अंबिया की सुन्नत है, क्योंकि पकड़ना उसी दाढ़ी का मुम्किन है जो लंबी और भरपूर हो।

[132] उम्मत में फूट से परहेज़

हज़रत हारून ने वाज़ेह किया कि अगर मैं सख़्ती करके जंग छेड़ देता तो क़ौम में ख़ानाजंगी हो जाती और आप फ़रमाते कि तुमने फूट डाल दी।

[133] बुज़ुर्गों के इख़्तिलाफ़ पर ख़ामोशी का अदब

हज़रत हारून ने सब्र से जवाब दिया। इससे मालूम हुआ कि अंबिया और सहाबा के बाहमी मुआमलात में अहले ईमान को अदब और हुस्ने ज़न रखना चाहिए, अपनी राय से तन्क़ीद नहीं करनी चाहिए।

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