Transliteration: (Qaala yabna'umma laa ta'khuz bi lihyatee wa laa bi ra'see innee khasheetu an taqoola farraqta baina Baneee Israaa'eela wa lam tarqub qawlee)
"हारून बोले, 'ऐ मेरी माँ के बेटे! न मेरी दाढ़ी पकड़िए [131] और न मेरे सर के बाल; मुझे डर हुआ कि कहीं आप यह न फ़रमाएं कि 'तुमने बनी इस्राईल में फूट डाल दी [132] और मेरी बात का इंतज़ार न किया [133] ।' "
हज़रत हारून ने नर्मी से 'ऐ मेरी माँ के बेटे' कहकर ख़िताब किया। इससे साबित हुआ कि मुट्ठी भर दाढ़ी रखना अंबिया की सुन्नत है, क्योंकि पकड़ना उसी दाढ़ी का मुम्किन है जो लंबी और भरपूर हो।
हज़रत हारून ने वाज़ेह किया कि अगर मैं सख़्ती करके जंग छेड़ देता तो क़ौम में ख़ानाजंगी हो जाती और आप फ़रमाते कि तुमने फूट डाल दी।
हज़रत हारून ने सब्र से जवाब दिया। इससे मालूम हुआ कि अंबिया और सहाबा के बाहमी मुआमलात में अहले ईमान को अदब और हुस्ने ज़न रखना चाहिए, अपनी राय से तन्क़ीद नहीं करनी चाहिए।
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